Monday, July 19, 2010

इन्द्रदेव को रिझाने मेढ़क-मेढ़की का विवाह

जोधपुर. मारवाड़ में बादलों की बेरुखी के चलते लोगों की आंखें आकाश की तरफ उठने लगी हैं। मौसम वैज्ञानिकों का आकलन और उपग्रहों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर की जाने वाली भविष्यवाणियां और पूर्वानुमान भी सटीक नहीं उतर रहे।

ऐसे में इंद्रदेव को रिझाने के लिए लोगों ने सामूहिक प्रार्थनाओं, दुआओं के साथ टोने-टोटकों को भी आजमाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में 19 जुलाई को जोधपुर शहर में मेढ़क-मेढ़की का विवाह रचाया जाएगा। ताकि इन्द्रदेव राजी हों और जमकर लोगों पर अपनी कृपा बारिश के रूप में बरसाएं।

मारवाड़ में बारिश की कामना के लिए इन्द्रदेव को रिझाने का यह पहला मौका नहीं है। करीब तीन साल पहले 20 जून 2007 को डूंगरिया महादेव मंदिर में मेढ़क-मेढ़की का विवाह रचाया गया था। इसके आयोजक जायन्ट्स सहेली ग्रुप का दावा है कि इस विवाह की वजह से ही उस साल क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई।

ग्रुप की अध्यक्ष रेखा परिहार ने बताया कि इस बार अलायन्स क्लब ऑफ जोधाणा सहेली, जायन्ट्स ग्रुप ऑफ जोधाणा सहेली एवं अलायन्स क्लब ऑफ जोधाणा के संयुक्त तत्वावधान में 19 जुलाई को सुबह दस बज गीता भवन के चक्रधारी मंदिर में यह अनुष्ठान होगा।

इंद्रदेव को मनाने का दौर जारी

शहर सहित जिलेभर में इंद्रदेव को मनाने के लिए पूजा-पाठ, यज्ञ हवन हो रहे हैं। हर कोई चाहता है कि इंद्रदेव मेहरबान हो बरखा बरसे, ताकि गर्मी से राहत मिले और खुशहाली आए।

क्यों होता है विवाह?

पौराणिक मान्यता रही है कि मेढ़क-मेढ़की की शादी रचाने का टोटका किया जाए। इसके पीछे ऐसी मान्यता है कि मेढ़क थोड़ी ही बारिश में ही टर्र-टर्र करने लगता है। मेढ़क पानी में और पानी के बाहर भी रह सकता है। जोधपुर में होने वाले इस आयोजन में मेढ़क और मेढ़की की शादी करवाने के बाद उन्हें पानी में छोड़ा जाएगा।

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